एम.एस.पी कमेटी का पुनर्गठन करें तथा नार्को-आंतकवाद से निपटें । सरदारनी हरसिमरत कौर बादल

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बठिंडा सांसद ने मुख्यमंत्री के झूठे दावों, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को कमजोर करने के बारे भी बताया

चंडीगढ़/ बठिंडा

बठिंडा सांसद सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने किसान आंदोलन हटाए जाने के समय लिखित में किए गए वादे के अनुरूप एमएसपी कमेटी के तत्काल पुनर्गठन करने की अपील करते हुए कहा कि संसद को नार्को-आतंकवाद से निपटने की आवश्यकता पर चर्चा करनी चाहिए जो पंजाब के युवाओं को तबाह कर रहा है तथा देश भर में इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हैं।
संसद के शीतकालीन सत्र की पूर्व संध्या पर बुलाई गई सर्वदलीय मीटिंग में सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पंजाब के किसान, कृषि विशेषज्ञों और सरकारी प्रतिनिधियों को शामिल करके एमएसपी कमेटी के पुनर्गठन के मुददे पर चर्चा की जानी चाहिए और इसका समाधान किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि किसान आंदोलन वापिस लिए जाने के समय किसान यूनियनों को दिए लिखित आश्वासन के अनुसार ही होना चाहिए । उन्होने कहा किसानों के एमएसपी के अधिकार को वादे के अनुसार वैध किया जाना चाहिए बठिंडा के सांसद ने उच्चतम न्यायालय की इस टिप्पणी के बात करते हुए कहा कि सीमावर्ती पंजाब जहरीली शराब और नशीले पदार्थों के कारण खतरे में है और कहा कि इस मुददे की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इस मुददे पर चर्चा करने की जरूरत है। उन्होने कहा कि पंजाब सरकार ने स्वीकार किया है कि भले ही उसने 36 हजार एफआईआर दर्ज करने के दावों के बावजूद कुछ केसों को जोड़कर केवल तीन आरोप पत्र ही दायर किए गए हैं। उन्होने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने चार सप्ताह में नशीले पदार्थों की समस्या को खत्म करने का वादा किया था तथा आप पार्टी के संयोजक ने घोषणा की थी कि ‘कटटर इमानदार’ सरकार दस दिनों में इसे खत्म कर देगी। उन्होने कहा कि  शीर्ष अदालत की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि जबसे आप पार्टी की सरकार ने राज्य की बागडोर संभाली है, तब से यह समस्या कई गुणा बढ़ गई है। उन्होने यह भी टिप्पणी की कि समय की मांग ‘नशाबंदी है, चूंकि अन्य राज्यों के सांसद भी मादक पदार्थों की बढ़ोतरी से चिंतित हैं, इसीलिए इस मुददे पर संसद में चर्चा की जानी चाहिए। सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने यह भी कहा कि कैसे पंजाब में गैंगस्टर खुद कानून बन गए हैं तथा आप पार्टी की सरकार उनके सामने बेबस है। उन्होने कहा कि गैंगस्टर टॉरगेट कीलिंग और जबरन वसूली में लिप्त हैं, जिससे राज्य के लोगों में भय का माहौल पैदा हो गया है। उन्होने कहा इसे ठीक करने के बजाय मुख्यमंत्री भगवंत मान गुजरात चुनाव से ठीक पहले झूठा दावा करके राजनीति कर रहे हैं, कि खूंखार गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को संयुक्त राज्य अमेरिका में हिरासत में लिया गया है, जबकि बाद में गोल्डी बराड़ ने मीडिया को इंटरव्यू के माध्यम से इस दावे का खंडन किया है। एक अन्य मुददे पर बोलते सरदारनी बादल ने यह भी कहा कि दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में गिरावट के मुददे को संसद में उठाया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि यह धान की कटाई खत्म हो जाने के बाद वहां का मौसम खराब हुआ है। उन्होने कहा पंजाब के किसानों पर पहले भी दिल्ली के वातावरण को दुषित करने आरोप लगाया गया है, हालंाकि यह स्पष्ट है कि समस्या कहीं और है तथा इस पर संसद में बहस करके समाधान खोजने की जरूरत है
बठिंडा की सांसद ने यह भी खुलासा किया कि पंजाबी इस बात से परेशान है कि चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होने कहा कि मूल राज्य पंजाब में 1970 में केंद्र सरकार द्वारा की गई घोषणाओं और संसद द्वारा राजीव-लोंगोवाल समझौते के अनुमोदन सहित विभिन्न घोषणाओं के बावजूद मूल राज्य अपनी राजधानी के बिना ही रहा है। उन्होने कहा कि यूटी में पंजाब और हरियाणा से 60ः40 के अनुपात में अधिकारियों की पोस्टिंग सुनिश्चित करने को भी नजरअंदाज किया जा रहा है, और एजीएमयूटी और डीएएनआईपीएस कैडर के अधिकारियों को चंडीगढ़ में तैनात किया जा रहा है। उन्होने कहा कि चंडीगढ़ में जमीन की अदला-बदली सौदे के तहत हरियाणा सरकार को जमीन आवंटित करने के कदम का पंजाबी विरोध कर रहे हैं।

सरदारनी बादल ने यह भी कहा कि किसी को भी धर्म के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नही दी जानी चाहिए। उन्होने कहा कि जिस तरह से केंद्रीय संस्थानों ने शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और कहा कि इस तरह के कदमों को तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित वीर बाल दिवस सिख लोकाचार के अनुसार नही है क्योंकि साहिबजादे साधारण बहादुर बच्चे नही थे। उन्होने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब ने पहले ही इसके खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। उन्होने मांग की कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के महान बलिदान को याद करने के लिए नाम को बदल दिया जाना चाहिए।

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