ब्लैकमेल बठिंडा में दविंदर गर्ग को राजू कोहनूर, उसके भाई और पत्नी ने छह अन्य लोगों के साथ मिलकर करते थे

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बठिंडा,  ग्रीन सिटी बठिंडा में दो बच्चों व पत्नी की गोली मारकर हत्या करने व बाद में खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने वाले व्यापारी व ट्रैडर दविंदर गर्ग के मामले में कैंट पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामला फोरन करंसी करिपटे बीटकान के लेनदेन से जुड़ा है। आरोपियों में महिला सहित एक ही परिवार के तीन लोगों पर लाकडाउन में हुए घाटे को पार्टनरों में बाटने की बजाय प्रोफिट निकालकर घाटा मृतक के ऊपर डालने से जुड़ा है। इसमें करोड़ों रुपए की देनदारी मृतक दविंदर गर्ग के सिर पर डाल दी गई। यही नहीं सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया है कि आरोपी लोग उन्हें सत्तापक्ष के साथ जुड़ा होने की बात कर मानसिक तौर पर परेशान करते थे व पैसे नहीं देने पर पुलिस कारर्वाई करवाने व जान से मारने तक की धमकियां देते थे। इन्हीं सबी बातों से दविंदर गर्ग पिछले छह माह में पूरी तरह से टूट चुका था व इस बाबत उसने सारा मामला इपने पिता व भाई के साथ भी सांझा किया था। परिजन उसे हौसला देते थे लेकिन वह पैसे लेने के लिए डाले जा रहे जबाव व कारर्वाई की धमकियों से इस कदर परेशान हो गया कि उसने पहले अपनी पत्नी को गोली मारी व बाद में दोनों बच्चों के सिर पर गोली मारकर खुद को मौत के घाट उतार लिया। बठिंडा में घटी यह घटना किसी बड़े खौफ से कम नहीं है जबकि उस मामले में पुलिस ने आरोपी लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसमें मृतक दविंदर गर्ग के भाई अश्वनी गर्ग वासी पंचवटी नगर बठिंडा ने बयान दर्ज करवाए कि पूरे मामले में बीटकान करंसी के लेनदेन जुड़ा है. लाकडाउन मार्च में लगा तो बीटकान करंसी के रेट कम हो गए। इस दौरान करोड़ों रुपए इसमें लगे थे। वही कुछ दूसरे पार्टनरों ने भी इसमें पैसा लगाया था। बठिंडा के राजू कोहनूर उसके भाई बब्बू कालड़ा व पत्नी अमन कोहनूर ने करंसी में लगाया पैसा प्रोफिट सहित निकाल कर अपने पास रख लिया व जो पैसा लोगों का देना था वह दविंदर गर्ग पर डाल दिया। यह राशि करोड़ों में थी जिसके चलते कुछ पैसा तो दविंदर ने किसी तरह दे दिया लेकिन इसी दौरान मनजिंदर सिंह हैप्पी, प्रवीण बांसल, संजय जिंदल बाबी, मनी बांसल सबी वासी बठिंडा, अशोक कुमार वासी रामा मंडी, अभिषेक जौहरी ने उस पर पैसा जल्दी देने के लिए दबाब बनाना शुरू कर दिया वही ऐसा नहीं करने पर उसे राजनीतिक रोब डालकर बर्बाद करने व पुलिस के पास केस दर्ज करवाने की धमकियां देना शुरू कर दी। उक्त लोग राजू कोहनूर से मिलकर उसे सत्ता पक्ष में पहचान होने व उसके खिलाफ कानूनी कारर्वाई करने की लगातार धमकियां दे रहे थे।  मनजिंदर सिंह धालीवाल, राजू केहनूर, अमन केहनूर, बब्बू कालड़ा, संजय जिंदल, प्रवीण बांसल, अभिषेक जौहरी, अशोक कुमार वासी रामा मंडी के साथ मन्नी बांसल पैसे के लेनदेन को लेकर दविंदर गर्ग को परेशान कर रखा था व उसे बर्बाद करने व उसके खिलाफ मामले दर्ज करवाने की धमकियां देते थे। इसी बात से परेशान दविंदर गर्ग ने गत वीरवार की दोपहर अपने ग्रीन सिटी स्थित किराये की कोठी में पहले पत्नी व बाद में दो बच्चों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया व बाद में स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में आरोपी लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए है। इस मामले में सबसे अहम सबूत मृतक की तरफ से तीन पेजों का लिखा गया सुसाइड नोट है जिसमें उसने अपने हस्ताक्षर कर इस बात की पुष्टी की है कि उक्त सभी आरोपिय़ों ने मिलकर उसे मानसिक तौर पर परेशान किया व स मुहाने में लाकर खड़ा कर दिया कि उसके पास मरने व बाद में परिवार को परेशान न करे इसलिए सभी को मौत के घाट उतारने के सिला कोई रास्ता नहीं बचा है। सुसाइड नोट में जिन लोगों के नाम लिखे हैं वह स्वयं को एक राजनीतिक पार्टी के नेता बताते थे।

गौरतलब है कि  बठिंडा की सबसे पाश कालोनी ग्रीन सिटी में आर्थिक तंदी व कर्ज से परेशान एक ट्रेडर ने अपनी पत्नी व दो बच्चों सहित गोली मारकर गत वीरवार की दोपहर को आत्महत्या कर ली थी। ग्रीन सिटी में 284 नंबर कोठी में किराये पर रहने वाले दविंदर गर्ग उम्र 41 साल ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा था इसमें अपनी आर्थिक मदहाली के साथ लोगों से लिए उधार पैसे वापिस करने की स्थिति में मानसिक तौर पर परेशान रहने का जिक्र किया है। वही इसमें पैसे लेने के लिए उसे मानसिक तौर पर परेशान कर रहे उपरोक्त 9 लोगों का भी जिक्र किया था। मृतकों में ट्रैडर दविंदर गर्ग उम्र 41 साल, उनकी पत्नी मीना गर्ग उम्र 38 साल, बेटी अरुष गोयल उम्र 14 साल व बेटी मुस्कान गर्ग उम्र 10 साल शामिल है। दविंदर गर्ग लंबे समय से विभिन्न कंपनियों में चैन मार्किटिंग का काम करते थे व कई कंपनियां जो बाद में चीटफंड कंपनी बनी में लाखों का लेनदेन दविंदर गर्ग ने किया था इसके चलते एक समय ऐसा भी आया जब कंपनियां भाग गई व उनकी आर्थिक हालत खस्ता हो गई व उन्हें अपनी प्रापर्टी व दूसरे एसिस्ट बेचने भी पड़े थे लेकिन पुछले कुछ समय से वह स्वंय को स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन इसी दौरान फिर से उनकी देनदारी बढ़ने लगी थी। वही कई चीटफंड कंपनियों ने उनके माध्यम से पैसे लगाए व कंपनियां भाग गई इसके चलते भी उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई। मृतक दविंदर गर्ग बाद में विभिन्न आईडी पर ट्रैडिंग का काम भी करते थे। इस दौरान लोगों से पैसों का लेनदेन चलता था। कोरोना के समय में भी ट्रैडिग का काम किया गया लेकिन इस दौरान लोंगों की देनदारी लाखों में हो गई थी जिसके लिए लोग उसे पैसे देने के लिए लगातार फोन करते थे। शहर में रातों रात अमीर बनने का सपना लेकर शहर के कई व्यापारी गैरकानूनी डब्बा व्यापार का धंधा भी करने लगते हैं इसमें बनी आईडी में सट्टेबाजी का धंधा भी चल रहा है। पुलिस को आशंका है कि उक्त व्यापारी भी इसी तरह के कारोबार में पैसा लगा लोगों को अमीर बनाने के सपने दिखाने वाले कुछ लोगों के झांसे में आकर काम कर रहा होगा जिसमें पूरा लेनदेन दो नंबर में होने के कारण मामले की शिकायत पुलिस के पास भी नहीं की गई होगी व आखिरकार देनदारों की तरफ से मानसिक तौर पर लगातार परेशान करने के चलते उसने आत्महत्या व परिवार की हत्या करने जैसा दुसाहसी कदम उठा लिया।

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